Mrs. Vachaal

लिखना मेरा शौक है जो अब जुनून बन गया है ।बातें करना मुझे अच्छा लगता है ,आजकल कागज और कलम से बातें करती हूँ ,इसीकारण से अपनी पोस्ट भी कभी बहुत छोटी नही लिख पाती । लिखते समय भी खुद से ही बातें करती हूँ ।लेकिन ज्यादा भारी बातों से मुझे परहेज है ।

सामान्यतौरपर हमेशा सकारात्मक रहने की कोशिश करती हूँ।मेरे विचार से जीवन का कोई ठिकाना नही इसलिए भरसक खुश रहने की कोशिश करना चाहिए ।

अपने देश के हृदय कहे जाने वाले अविभाजित मध्यप्रदेश का छत्तीसगढ मेरी जन्मभूमि है ।
शासकीय सेवारत प्रोफेसर की बेटी होने के कारण प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर मध्यप्रदेश के अलग-अलग शहरों मे मेरा बचपन और युवावस्था का कुछ समय बीता ।

शरीर मे बहने वाले रक्त मे पूर्वान्चल का जोश है क्योंकि पारिवारिक जड़ें पूर्वान्चल की हैं ।
विवाह के बाद अवध को अपनाया इसलिए लिखने मे पूर्वान्चल की मिट्टी की महक के साथ-साथ अवध का लहजा अपने आप ही आ जाता है।

एक दशक से ज्यादा समय से दिल्ली मे रहते हुए अब दिल्ली को अपना शहर बना लिया है इसलिए अपने विचारों को बिन्दास तरीके से लिखने की आदत से मजबूर हूँ ।

मेरे विचार से सभी भाषाएं सुन्दर होती हैं, हर भाषा का अपना आकर्षण होता है, लेकिन अपने भावों को पूरी तरह से कोई भी व्यक्ति उसी भाषा मे उगल सकता है जिस भाषा के साथ गहराइयों से जुड़ा हुआ हो।

मै हिन्दी भाषा मे अपने विचारों को रखती हूँ क्योंकि पूरी तरह से मै हिन्दी को ही अपना पायी हूँ ।