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sadhana jain

लिखना मेरा शोक सही, लिखती कुछ कही, अनकही, बीती-आपबीती, अनदेखी -अनजानी, सखी- सहेली मेरी लेखनी, कुछ अपनों ने, कुछ परायों ने, कुछ खुशी ने कुछ गम ने, कुछ प्यार ने, कुछ दिल ने, जो बुनी है उलझने, कोशिश है कलम की , जो लगी है उसे सुलझाने , ये है मेरी छोटी सी दुनियां , कोइ गम ना रहता यहां, ना ही कोइ ताने-बाने, शब्द मेरे मन के , सजाती कलम है , यही मेरा आलम है यही मेरा आलम है। 😊😊😊😊😊😊😊😊

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