pankajchandnani

इस उम्र के आगे आसमान के पार, काले बादलो को चीरती इक अवाज़, ये आवाज़ नही है मेरी उधार मिली है उनसे, जो खो गए कही उन गलियो मे, जहां जाने की ना हुई हिम्मत, रोका था न किसी ने फिर भी रुके रहे, उम्मीद है पहुंच पाउँगा इक दिन, इसी जिंदगी मे इसी समय मे।