रतिवाल

हिन्दी प्राध्यापिका,बीस वर्षों से अध्यापन कार्य ,1998 से लेखन में सक्रिय,दैनिक ट्रिब्यून, दैनिक भास्कर,दैनिक जागरण,नभछोर,पाठक पक्ष आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं कहानी,लघुकथाएं,लेख व संस्मरण प्रकाशित।लेखन मेरे लिए अनुभूति की अभिव्यक्ति है। इसलिए मेरी रचनाओं में सत्य कल्पना के पंख फैला सामाजिक अन्याय,उत्पीड़न,लैंगिक भेदभाव पर प्रहार कर नव व अनुकूल मूल्यों को स्वीकृति प्रदान करता है।